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अब तो मन करता है कि मै साधु बन जाऊँ (Now I feel like become a monk/Sadhu )

अब तो मन करता है कि  मै साधु बन जाऊँ (Now I feel like become a monk/Sadhu ) 

           जब भी कोई व्यक्ति जन्म लेता है तो वह अपने जीवन का कुछ अमूल्य समय अपने माता पिता के सानिध्य में बिताता है जिसे हम और आप बचपन कह सकते है इसके बाद उस बच्चे पर पढ़ने का भार शुरू हो जाता है और वह स्कूल/ विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करना प्रारम्भ कर देता हैा और दुनिया में जीवन जीने के लिए अचार विचार सीखता है इसके बाद अच्छी शिक्षा ग्रहण करने की कोशिश करता है जब वह स्कूल की शिक्षा पूर्ण कर लेता है उससे पहले ही वह जब स्कूल की प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करना प्रारम्भ करता है तभी से उसके ऊपर कुछ बनने का भर लादना शुरू हो जाता है लोग पूछने लगते है की बेटा/ बेटी बड़े होकर क्या बनोगे तब उस बच्चे का जबाब क्या होता है ये उसके लिए बड़ा ही मुश्किल काम होता है क्योकि उसको पता ही नहीं होता है की वो क्या बोले क्योकि इस बारे में उसको कुछ ज्ञान ही नहीं होता है ा जब वह अपने आस पास का माहौल देखता है कोई  बस, कर ड्राइवर या फिर पुलिस अफसर या डॉक्टर दिखता है तब उसको लगता है की मुझे ये बनना चाहिए पर वास्तविक ज्ञान नहीं होता है इस मामले मै अधिकतर देखा गया है कि माता पिता या फिर किसी करीबी द्वारा कुछ बनने का ज्ञान दिया जाता है और उस बच्चे पर अपनी महत्वाकांक्षा को थोप दिया जाता है जिस कारण से उस बच्चे की शिक्षा और अन्य कार्य कलाप उसी प्रकार निश्चित कर दिए जाते है। 

         जब बच्चा बड़ा होता है पढ़ाई लिखाई  करके नौकरी के आवेदन करता है तब मन बहुत सी उमंगें उठने लगती है उसके बाद परीक्षा पूर्ण होने के बाद पता चलता है की उसको ये नौकरी नहीं मिल सकती क्योकि उससे भी कोई ज्यादा पॉवर फुल व्यक्ति है जो पढ़ाई में अच्छा नहीं है पर उसकी जान पहचान एवं रसूख ज्यादा है जिस कारण से उसको ये नौकरी नहीं मिल पायी तब उसको पता चलता है की पढ़ाई के अलावा भी कुछ चीजों की भी जरुरत होती है जैसे भ्रष्टाचार/ कालाबाज़ारी / भेदभाव/ भाई भतिजाबाद का पता चलता है ये कोण से शब्द है जिनके दम पर कला -कौशल का कोई मूल्य नहीं रहा और  भ्रष्टाचार जीत गया। 

            आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी को देखते हुएऔर चारो तरफ अजीब सा माहौल देखकर अब तो मन करता है की साधु बन जाऊ और उस ईश्वर में खो जाऊ जिसने ये सूरज चाँद बनाया जिसने मुझे बनाया जिसने मुझे श्वास लेने लायक बनाया जिसने मेरी ऑंखें बनायीं जिस कारण से मै इस दुनिया को देख पता हूँ। 


Comments

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