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Showing posts from March, 2020

अब तो मन करता है कि मै साधु बन जाऊँ (Now I feel like become a monk/Sadhu )

अब तो मन करता है कि  मै साधु बन जाऊँ (Now I feel like become a monk/Sadhu )             जब भी कोई व्यक्ति जन्म लेता है तो वह अपने जीवन का कुछ अमूल्य समय अपने माता पिता के सानिध्य में बिताता है जिसे हम और आप बचपन कह सकते है इसके बाद उस बच्चे पर पढ़ने का भार शुरू हो जाता है और वह स्कूल/ विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करना प्रारम्भ कर देता हैा और दुनिया में जीवन जीने के लिए अचार विचार सीखता है इसके बाद अच्छी शिक्षा ग्रहण करने की कोशिश करता है जब वह स्कूल की शिक्षा पूर्ण कर लेता है उससे पहले ही वह जब स्कूल की प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करना प्रारम्भ करता है तभी से उसके ऊपर कुछ बनने का भर लादना शुरू हो जाता है लोग पूछने लगते है की बेटा/ बेटी बड़े होकर क्या बनोगे तब उस बच्चे का जबाब क्या होता है ये उसके लिए बड़ा ही मुश्किल काम होता है क्योकि उसको पता ही नहीं होता है की वो क्या बोले क्योकि इस बारे में उसको कुछ ज्ञान ही नहीं होता है ा जब वह अपने आस पास का माहौल देखता है कोई  बस, कर ड्राइवर या फिर पुलिस अफसर या डॉक्टर ...

Who am I (मै कोन हूँ )

Who am I (मै कोन हूँ )        सबसे पहले हर एक व्यक्ति ये सोचने को मजबूर हो जाता है कि वो है कौन और उसने इस दुनिया में जन्म क्यों लिया है ?          कुछ समय बाद व्यक्ति जब वह अपने काम काज में व्यस्त हो जाता है तो वह अपने बारे में सोचना बंद कर देता है फिर रोजमर्रा के कामकाज में व्यस्त हो जाता है इसके बाद वह अपनी आकाँक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अधिक से अधिक धन कमाने में लग जाता है, और वह एक मशीन बनकर रह जाता है और कभी उसके मन में ये नहीं आता कि वह व्यक्ति कौन हैा वह व्यक्ति अपनी जूठी शान में जीता जाता है क्योकि उसको ऐसा लगने लगता है की उसने बहुत कुछ पा लिया है जब थोड़ा सा धन इकट्ठा कर लेता है या फिर उसको कोई उच्च पद प्राप्त हो जाता  है तो उसके मन में विकार उत्पन्न हो जाते है जैसे घमंड, अहंकार, लोभ, क्रोध और कुछ अन्य प्रकार के विकार इसमें शामिल है।          जब भी व्यक्ति इन विकारों में फसने लगता है या ग्रसित होने लगता है, तो वह "मै कौन हूँ " भूल जाता है और वह अ...